जाने अनजाने चेहरों की भीड़ में, इंसान की पहचान मुश्किल है,
और चेहरे पे चढ़े नकाबों से, सच झूठ का अनुमान मुश्किल है,
कौन अपना, कौन पराया, और कौन भरोसे के काबिल है,
किसकी माने, किसको छोड़े, इस उलझन में उलझा-उलझा सा ये दिल है।
और चेहरे पे चढ़े नकाबों से, सच झूठ का अनुमान मुश्किल है,
कौन अपना, कौन पराया, और कौन भरोसे के काबिल है,
किसकी माने, किसको छोड़े, इस उलझन में उलझा-उलझा सा ये दिल है।
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