बेरुखी उनकी अब और सही नहीं जाती,
कोशिश लाख की मगर इन आँखों की नमी नहीं जाती,
वो सोचते हैं कि मैं जिंदगी से खुश हूँ बहुत,
क्या करूँ कि वो सामने होते हैं तो होंठो से हंसी नहीं जाती!!!
कोशिश लाख की मगर इन आँखों की नमी नहीं जाती,
वो सोचते हैं कि मैं जिंदगी से खुश हूँ बहुत,
क्या करूँ कि वो सामने होते हैं तो होंठो से हंसी नहीं जाती!!!
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