Monday, October 14, 2013

Sukoon

घर लौटते हुए जब यूं ही चाँद की और निगाह गयी
अपनी ही जिंदगी मुझे कुछ अजनबी सी लगी
मदमस्त चांदनी को निहारते हुए सोचती ही रही 
वो बेफिक्र सुकून की रातें जाने कब कहाँ गम हुई!!!