तेरी जुदाई का गम मिटाने के लिए, नए दोस्त बनाये मन को बहलाने के लिए,
जाने लगी मैं महफ़िलो में भी अक्सर, तुझसे मिली तन्हाई मिटाने के लिए,
बहुत वक़्त बीता, न गम गया जुदाई का, न तन्हाई ने साथ छोड़ा मेरा,
अब तो काजल भी बेअसर हो गया है, रो रो कर सूजी आँखे छिपाने के लिए.
बहुत वक़्त बीता, न गम गया जुदाई का, न तन्हाई ने साथ छोड़ा मेरा,
अब तो काजल भी बेअसर हो गया है, रो रो कर सूजी आँखे छिपाने के लिए.
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