लगने लगा है अब डर मुझे, कहीं आम हो ना जाये लोगों में ये तेरी - मेरी बात कहीं ,
क्या करू कि आकर ठहर गए हैं लबों पे मेरे,एक तेरा नाम और एक खनकती हंसी!!!
क्या करू कि आकर ठहर गए हैं लबों पे मेरे,एक तेरा नाम और एक खनकती हंसी!!!
All my shayaris & poems at one place... expressions of my idle mind... all for you to read and to enjoy...!!!