Saturday, October 6, 2012

?????

निश्चिंत है तू सौंपकर मुझे एक अजनबी के हाथो में यूं,
जैसे मोहब्बत मुझसे तुझको कभी थी ही नहीं!!!!!

Khamosh mohabbat

उनसे मुलाकात होती है अब भी कभी-2,
महसूस होती हैं कई बातें दिल में दबी-2
जरुरत कुछ कहने सुनने की फिर भी लगती नहीं,
दे देती है गवाही मोहब्बत की, उनकी खामोश आँखे झुकी-2

Ummeed

उम्मीदों पे जीना छोड़ दिया मैंने
जब कुचल दिया उसने मेरी उम्मीदों को अपने कदमो तले !!!

Kadra

दुनिया की नज़रों में क़द्र खोजते-2
ना जाने कब खो दी क़द्र अपनी ही नज़रों में
आज सोचा तो महसूस हुआ कि अब तक 
यूं ही कटती रही ज़िन्दगी कतरों-2 में।।।