Tried to write something like the once we used to read in school time
ज़िन्दगी कैसी अजब पहेली है,
कभी है गम इसका साथी, खुशिया कभी सहेली है.
हँसना-रोना, खोना-पाना थोड़ी आँख मिचौली है,
उंच नींच है थोड़ी इसमें, थोड़ी हंसी ठिठोली है.
हंसकर जीना जिसने सिखा, जीवन उसका होली है,
और जो ये राज ना समझ सका, उसकी खाली झोली है.
No comments:
Post a Comment